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चाहें पिया का हो घर परदेश में, पीहर तो मेरा है, तेरा घर कृष्णा !!

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चाहें पिया का हो घर परदेश में, पीहर तो मेरा है, तेरा घर कृष्णा !! मोहब्बत का पहला पयाम कृष्णा, उगता हुआ सा जैसे चाँद कृष्णा ! बिन तेरे महफ़िलों में नूर नहीं है, मोहब्बत का तुझे है सलाम कृष्णा !! सर पे रखा हो जैसे दस्ते खुदा, मंजिल-ए-इश्क है राधेनाम कृष्णा ! मुझे तो नदिया की धार सा लगे, जैसे रिश्तों का घुला जाम कृष्णा !! मुझे मिल जाए बस तेरी दुआ, तू है सबकी निगाहों का प्यार कृष्णा ! माँ का दुलार, पिता का प्यार सा लगे, मेरे लिए तो भाई का दुलार कृष्णा !! यही पे हूँ जन्मी थी, यहीं पे पली, फूलों की डोली सजाके विदा किये कृष्णा ! चाहें पिया का हो घर परदेश में, पीहर तो मेरा है, तेरा घर कृष्णा !! मैं तो खुद तेरी ही पनाहों में पली, मेरी मर्यादा ही मेरी दहलीज कृष्णा ! जाऊं दूर कहीं मैं तुमसे कभी, रखना सदा ही सर पे मेरे अपना हाँथ कृष्णा !! जो कहते है इश्क गैर सा लगे, उनके दिलों में तो फ़क्त बैर कृष्णा ! मेरे अरमानों की शान सा लगे, तू है अजीज और महान कृष्णा !! तू ख़्वाबों में भी कभी जो मुझे याद कर ले, महके ये घर सारा दिन कृष्णा ! रखना शरण में तू मुझको सदा, तुझे सारे जग की कसम कृष्णा !! किसी के...

“खुशी जी आपको मेरा सलाम” / एक संस्मरण.....

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यही कोई 40 से 45 के बीच की रही होगीं वो गठीला बदन, घने काले बाल थ्री स्टेप में कटे हुए, माथे पर सुर्ख लाल बिंदी उनके चेहरे की खूबसूरती को और भी बढ़ा रही थी हलकी हवा के झोके से उनके बालों की लटकती हुई लट लयमान होकर मानो उनके चेहरे को पूरी तरह से ढकना चाह रही हो उनके एक ओर शून्य में एकटक निहारने की कोशिश जो बरबस उनकी तरफ मुझे आकर्षित कर रही थी  उनके व्यक्तित्व को देखकर कोई भी ये महसूस कर सकता था कि उनके चेहरे पर प्रकति ने स्थाई रूप से मुस्कुराहट और प्यार चिपकाए होंगे लेकिन वक्त के थपेड़ों ने पीड़ा, दर्द, थकान के अनगिनत धब्बे उकेर दिए हैं। फिर भी चेहरे पर नजर आने लगी झुर्रियों के बीच आई मुस्कुराहट और प्यार छुपाए नहीं छुपता था ! समय का दिया हुआ दर्द भी उनके चेहरे की सिलवटों पर साफ नजर आ रहा था ! उनको देखकर बार-बार मेरा मन एक ही सवाल करता था कि अपनी किशोर उम्र में शादी के पहले, और जवान उम्र में शादी के बाद उन्होंने भी सपने जरूर देखे होंगे पर उनके चेहरे पर ये सपने नहीं, केवल उन के भग्नावशेष ही दिखाई दे रहे थे ! उस सभ्य महिला के करीब जाने से पहले मैंने जाने कितने भाव अपने...

निज भाषा का नहीं गर्व जिसे, क्या प्रेम देश से होगा उसे….

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अगर देखा जाये तो हिन्दी की वर्तमान दुर्दशा के लिए बहुत हद तक हिन्दी को सम्मान दिलाने की बात करने वाले राजनेता, नौकरशाह, बुद्विजीवी, लेखक तथा पत्रकार सम्मिलित रूप से जिम्मेदार हैंl …… एक मात्र हिंदी ही ऐसी भाषा है l जो संपूर्ण भारत को एकता के सूत्र में बांध कर चल रही है l हिंदी दुनिया में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। य़ह अपने आप में पूर्ण रूप से एक समर्थ और सक्षम भाषा है। हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति का नाम होने के साथ-साथ हिंदी विश्व की सबसे शक्तिशाली भाषा है l ये हमारे गौरव को बढ़ाती है और साथ ही हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा के रूप में स्थापित सभ्यता का प्रतीक भी है l सबसे बड़ी बात है कि यह भाषा जैसे लिखी जाती है, वैसे बोली भी जाती है। दूसरी भाषाओं में कई अक्षर साइलेंट होते हैं और उनके उच्चारण भी लोग अलग-अलग करते हैं, लेकिन हिंदी के साथ ऐसा नहीं होता, इसीलिए हिंदी को बहुत सरल भाषा कहा जाता है। हिंदी अति उदार, समझ में आने वाली सहिष्णु भाषा होने के साथ भारत की राष्ट्रीय चेतना की संवाहिका भी है। किसी भी आर्थिक रूप से प्रगति करते देश की राजभाषा वहाँ के लोगो क...

अपने अधिकारों एवं दायित्वों के प्रति कितने जागरुक हैं उपभोक्ता : शराबबंदी संघर्ष समिति

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“शराबबंदी संघर्ष समिति”   पिछले कई वर्षों से शराबबंदी अभियान के साथ-साथ समाज में सुलगते सवालों को मद्देनजर रखते हुए इस देश की आवाम में   जागरूकता का कार्य कर रही है l “ शराबबंदी संघर्ष समिति ”   अपने नेत्रत्व में “उपभोक्ता जागरूक अभियान” की मुहीम भी चला रही है l समाज के प्रति जागरूक ये समिति समय-समय पर नागरिकों को सचेत करती रहती है l “ शराबबंदी संघर्ष समिति ” के अध्यक्ष जनाब मुर्तजा अली ने पूर्ण प्रज्ञावान और जागरूक नागरिक बनकर देश और समाज की सेवा करने का जो बीड़ा उठाया है उसके लिए उनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है l उनका कहना है कि हम सभी को पूर्ण प्रज्ञावान और सचेत नागरिक बनकर राष्ट्र और समाज की सेवा करनी चाहिए l समाज सेवा से बड़ा पुण्यकार्य कोई नहीं। समाज सेवा अगर नि:स्वार्थ भाव से की जाए तो मानवता का कर्तव्य सही मायनों में निभाया जा सकता है। देखा जाए तो आज बाजारवाद की प्रवृत्ति बढ़ रही है। भौतिकता की ओर कंपनियों का रूख है। खाद्य पदार्थों में मिलावट , चोर बाजारी , कम तौल , मिथ्या-प्रचार , भ्रामक विज्ञापन , तथ्यों को छिपाकर उपभोक्ताओं के साथ छल किया जा ...

“नारी व्यथा” माथे की बिंदी से पाँव के बिछुओं तक

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आज फिर सुर्ख़ियों में पढ़कर एक नारी की व्यथा , व्यथित कर गयी मेरे मन को स्वतः नारी के दर्द में लिपटे ये शब्द संजीव हो उठे हैं इस समाज के दम्भी पुरुष कभी किसी दीवार के पार उतर के निहारना नारी और पुरुष के रिश्ते की उधडन नजर आएगी तुम्हे कलाइयों को कसके भींचता हुआ , खींचता है अपनी ओर बिस्तर पर रेंगते हुए , बदन को कुचलता है बेबसी और लाचारी में सिसकती है , दबी सहमी नारी की देह पर ठहाकों से लिखता है , अपने समय की कब्र में , एक कटुता का रिश्ता अपने जख्मों को निहारती लहुलुहान रिश्तों को जेहनी गुलामी का नाम देकर सहलाती है , पुचकारती है ,  दर्द में बिन आंसुओं के रोती है जिन्दगी भर उस गुलामी को सहेजती है ,  ऐ खुदा तेरी बनाई ये नारी........... माथे की बिंदी से पाँव के बिछुओं तक में लिखती हैं पुरुष का नाम चूड़ियों का कहकशा , जर्द आँखों की जलन बेबसी कहीं विलीन क्यों नहीं होती   पल - पल ठंडी राख सा होता उसका बदन , जलते हुए अक्षरों का दर्द मिटा नहीं पाता कि फिर लिख देता है पुरुष अपने बल से नारी की देह पे क्रूरता की परिभाषा बाजुओं की ...

नारी को प्रकृति ने स्वयं शक्ति का रूप दिया है.....

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भारत में कई कानून बनने के बाद भी बलात्‍कार की वारदातें बदस्‍तूर जारी हैं। आखिर हमारे समाज में यौन हिंसा जैसे घिनौने अपराध होते ही क्यों है ? जैसे-जैसे हमारा समाज अधिक शीक्षित और प्रगतिशील होता जा रहा है , वैसे-वैसे ही समाज में महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं । खासतौर पर हाल के दिनों में नाबालिग बच्चियों के यौनशोषण के मामले लगतार बढ़ते ही जा रहे हैं | रोज़ाना अलग-अलग राज्यों से बलात्कार की घटना की खबरें आती हैं l महिलाओं के प्रति अपराध विशेषकर बलात्कार की घटनाओं का मूल कारण है महिलाओं के प्रति समाज की विकृत धारणाएं और महिलाओं को दैहिक स्तर पर देखने की मानसिकता। इसी प्रकार महिलाओं के प्रति हिंसा , चाहे वह बाहरी हो या फिर घरेलू , के पीछे महिलाओं के प्रति हीन भाव का होना प्रमुख कारण है। हम सब एक खाली पन्ने के साथ पैदा हुए हैं , जो धीरे-धीरे जीवन के अनुभवों से भरता जाता है , यही अनुभव हमें आकार देते हैं कि हम क्या बनना चाहते हैं. हम सब अपनी-अपनी परवरिश से प्रभावित होते हैं , जो हमारी जीवन की कहानी के पन्नों के लिए नींव का काम करती है. एक साफ़ सुथरे चरित्र की ...

मादक दवाओं से जुड़े लोगों पर कठिन दंड का हो प्रावधान

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हमारे समाज में अमूमन शराब , व्हिस्की , रम , बीयर , महुआ आदि का प्रचलन तो है ही , लेकिन कई अवैध मादक पदार्थ यथा भांग , गांजा , चरस , हेरोइन , ब्राउन शुगर , कोकीन और इन दिनों सर्वाधिक प्रचलित चिट्टा भी शामिल है। नशा देश की सबसे बड़ी समस्या है। देश में नशे की जड़ें इस कदर फैल चुकी हैं कि अब सरकार को भी अपनी एजेंसियों को सक्रिय बनाकर नशे के कारोबारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। अपराध जगत के क्रिया-कलापों पर गहन नजर रखने वाले मनोविज्ञानी बताते हैं कि अपराध करने के लिए जिस उत्तेजना , मानसिक उद्वेग और दिमागी तनाव की जरूरत होती है उसकी पूर्ति ये नशा करता है जिसका सेवन मस्तिष्क के लिए एक उत्प्रेरक की तरह काम करता है। देखा जाए तो नशे का कारोबार जिस तरह से उत्तर प्रदेश में तेज़ी के साथ फैल रहा है , ये कहना ग़लत नहीं होगा कि आने वाले वक्त में यूपी नशाखोरी के मामले में अन्य राज्यों को पिछाड़ कर देश में अव्वल नंबर पर आ जाएगा स्कूली बच्चों में नशा करने का तरीका बदल रहा है आमतौर पर लोग   शराब , सिगरेट , गांजा , हेरोइन को ही नशा का प्रमुख कारक मानते हैं लेकिन बच्चे न...