किशोरियों की व्यक्तिगत स्वच्छता बेहद अहम...




किशोरियों की व्यक्तिगत स्वच्छता बेहद अहम...
आज के दौर में लडकियाँ हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिला कर देश के विकास में अपना योगदान दे रही हैं। फिर भी वे आज अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं है या फिर उन्हें उम्र के पड़ाव पर पूरी जानकारी नहीं होती। जिसके कारण किशोरियों के मन में गलत भ्रांतियां घर कर जाती है और देखा तो यहां तक गया कि कई किशोरियां डिप्रेशन की शिकार तक हो जाती हैं। साथ ही उन्हें छुआछूत के दायरे में बांध दिया जाता है। इस मिथक को तोड़ने के लिए एवं प्यारी बेटियों के मुस्कान को सुरक्षित रख कर उन्हें बेहतर वातावरण देने के लिए शारीरिक स्वच्छता के साथ-साथ शौचालय बहुत आवश्यक है l जब बच्चियां बाल्यावस्था से किशोरावस्था में प्रवेश करती हैं, तो यह समय उनके लिए बेहद अहम रहता है। हार्मोनल चेंजेस के कारण वे महत्वपूर्ण शारीरिक बदलाव के दौर से गुजरती हैं। जिसका सीधा असर उनके कोमल मन पर पड़ता है। माहवारी शुरू होने पर अधिकांश बच्चियां संकोच के कारण मां से इस विषय पर खुलकर चर्चा नहीं करती हैं। लड़कियों के लिए पीरियड्स एक बहुत ही निजी मामला है। जिसके बारे में हम कभी न तो किसी से पूछते हैं कि पीरियड्स के दौरान सही तरीके से हाइजिन का ध्यान कैसे रखा जाए और हमारा तरीका सही है या नहीं। कई बार हम दिनभर एक ही नैपकीन इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में महिलाएं अब भी कपड़े का इस्तेमाल करती हैं जो अक्सर कई बार इस्तेमाल किया जाता है। अभी भी महिला स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे पर गाँव में छिपकर ही बात की जाती है। यहां तक की किशोरियां युवतियां और महिलाएं डॉक्टर से बात करने मे संकोच करती हैं। चूंकि पीरियड्स को गंदा माना जाता है और इसी के चलते कुछ घरों में गंदे कपड़े को धोने के लिए डिटर्जेंट का इस्तेमाल करने की भी मनाही होती है। ऐसे में निश्चित तौर पर इन महिलाओं के लिए साफ-सफाई रखना काफी मुश्किल हो जाता है। लड़कियों और महिलाओं के लिए इस अवरोध के कई चेहरे हैं। एक ओर अभी बाजार में बिकने वाली सेनिटरी नैपकिन बहुत महंगी हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में खरीद के लिए अनुउपलब्ध हैं। दूसरी ओर, किसी परिवार या समुदाय में मासिक धर्म के बारे में जानकारी पुरानी पीढ़ी की महिलाओं के जरिए दी जाती है जिससे प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी देखरेख के बारे में समझ में कमी रह जाती है। मासिक धर्म के बारे में चर्चा को प्रायः किनारे कर दिया जाता है और उस पर बात ही नहीं की जाती है। ये सारी चीजें मासिक धर्म के बारे में अंतर्निहित अरुचि से प्रभावित हैं और इसका फैलाव पूरी दुनिया की संस्कृतियों में है। लेकिन भारत में मासिक धर्म के साथ जुड़ी वर्जनाएं बहुत गंभीर हैं और महिलाओं को कुछ खास चीजें खाने, कुछ खास लोगों से बोलने या यहां तक कि रोजमर्रे की गतिविधियों में भाग लेने से भी रोकती हैं। हर माह घटित होने वाले एक शारीरिक कार्य को अभी भी इस निगाह से देखा जाता है के इसके लिए लड़कियों को शर्मिंदा होना चाहिए। इस चुनौती से जूझने के लिए लड़कियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए जो अपने समुदायों में जाकर प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाएं। ताकि आकार आकर्षक कार्यक्रम तैयार कर सके जो ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों को व्यापक, परस्पर संवाद वाली पाठ्यचर्या के जरिए मासिक धर्म से जुड़ी साफ-सफाई के बारे में शिक्षित करे l हमें एक अंतर्राष्ट्रीय आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है जो मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता को लेकर व्याप्त चुप्पी को तोड़े और ऐसी जागरूकता पैदा करे जो अपने शरीर को लेकर गर्व की अनुभूति कराने के लिए लड़कियों का सशक्तीकरण करे।
परिभाषा... व्यक्तिगत स्वच्छता से तात्पर्य किसी व्यक्ति के शरीर और कपड़ों की स्वच्छता को बनाए रखना है ताकि समग्र स्वास्थ्य और कल्याण हो। इसमें स्व-देखभाल के निम्नलिखित सामान्य क्षेत्रों से संबंधित कई अलग-अलग गतिविधियां शामिल हैं l शौचालय का उपयोग करने के बाद स्वयं को साफ करना या धोना; मुंह की उचित देखभाल करना, ग्रूमिंग और ड्रेसिंग और कपड़ों को साफ रखना। स्नान करना, कपड़े पहनना और कपड़े उतारना और शौचालय का उपयोग करना दैनिक जीवन (ADL) की गतिविधियों को माना जाता है, जबकि कपड़े धोने का कार्य दैनिक जीवन या IADL की एक महत्वपूर्ण गतिविधि माना जाता है.
शौचालय निर्माण.... भारत में शौचालय निर्माण को अभी भी सिर्फ स्वच्छता अभियान से जोड़कर ही देखा जाता है न कि स्वास्थ्य की बुनियादी जरूरत से, जबकि असल में शौचालयों की जरूरत और अहमियत, सिर्फ साफ-सफाई तक ही सीमित नहीं है. खासतौर से महिलाओं के लिए शौचालय उनके स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर को भी सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं. स्कूलों में शौचालय न होने के कारण अक्सर ही लड़कियों को सात-आठ घंटे पेशाब रोकना पड़ता है. या फिर वे बहुत कम पानी पीकर काम चलाती हैं l इस कारण किडनी, पेशाब संबंधी इंफेक्शन या फिर प्रजनन संबंधी बीमारियां होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है l इसका प्रमुख कारण स्कूलों में शौचालय का न होना है 47 प्रतिशत स्कूलों में आज तक लड़कियों के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं है l इसी तरह गांवों में भी महिलाएं घर में शौचालय न होने के कारण मुंह अंधेरे सुबह और मुंह अंधेरे शाम को ही खेतों में जा पाती हैं. दिन के किसी अन्य समय पर शौचालय जाने की जरूरत महसूस होना उन महिलाओं के लिए बड़ी समस्या है. बहुत सारे सरकारी या निजी स्कूलों में आज भी महिला अध्यापिकाओं के लिए अलग से शौचालयों की व्यवस्था नहीं है. यहां तक कि बड़े शहरों में भी छोटे संस्थानों या दफ्तरों में काम करने वाली लड़कियों/महिलाओं के लिए भी अक्सर ही कोई शौचालय नहीं होता है .
अक्सर लड़कियों को यह पता नहीं होता है कि महावारी के दौरान वे क्या सावधानी बरतें, क्या करें और क्या न करें। ऐसे समय में बालिकाएं संकोच न करें और सारी बातें मां से खुलकर करें, साथ ही मां भी बेटियों की सहेलियां बनें। ताकि उनका जीवन सुरक्षित और उज्जवल हो सके। पूरे घर का ध्यान रखने वाली लड़कियां आज भी स्वयं से जुड़ी कई जरूरी बातों से अनजान हैं.
सफाई का मतलब यह नहीं होता कि हम सिर्फ चेहरे को साफ और चमकदार रखें। शरीर के तमाम अंगों की सफाई पर उचित ध्यान देना जरूरी है। गर्दन, पीठ, कुहनी, घुटने, तलवे आदि ऐसे ही अंग हैं जिनकी सफाई पर उचित ध्यान नहीं दिया जाता।
गर्दन: गर्दन की त्वचा पतली होती है, जिस कारण गंदगी जमा होने पर इसे नुकसान पहुंचने की आशंका ज्यादा रहती है। हम गर्दन के पीछे के हिस्से को साफ करने में अक्सर आलस बरतते हैं। इसके लिए जरूरी है कि हम दिन में दो बार गर्दन के इस हिस्से की हल्के से मालिश करें। पुरुषों को यह ध्यान रखना जरूरी है कि शेव कराते समय गर्दन के आगे के हिस्से और बाल कटवाते समय इसके पीछे के हिस्से पर ज्यादा नीचे तक रेजर न लगाएं। इससे यहां बाल उगेंगे, जो परेशानी की वजह बन सकते हैं।
पीठ: पीठ को हम देख नहीं सकते और इसे साफ करने के लिए हमारे हाथ आसानी से इस तक नहीं पहुंचते। इस कारण यह शरीर का सबसे गंदा अंग बन जाती है। इसकी सफाई के लिए जरूरी है कि बॉथरूम में एक लंबा ब्रश रखें और रोज इसे ढंग से साफ करें। फिर भी अगर गर्मियों में पीठ की त्वचा उखड़ती हैं तो इसके लिए किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह लें।
हाथ: वैसे तो हम जितनी बार चेहरे को साफ करते हैं, हमें हाथों को भी साफ करना ही पड़ता है। इसके बावजूद कई बार हम पाते हैं कि हमारे हाथों के कुछ हिस्सों में गंदगी जम जाती है, जैसे अंगुलियों के बीच में या हथेली और हाथ के जोड़ की जगह पर। इसके लिए जरूरी है कि भले ही हम दिन भर में कम बार हाथ धोएं लेकिन जब भी धोएं, तो ऐसा बेहतर तरीके से करें। कोशिश करें कि हाथ धोने के लिए हल्के लिक्विड साबुन का इस्तेमाल करें। सुबह और रात में सोने से पहले हाथों पर हल्का लोशन या क्रीम लगाने की आदत भी डालें। नाखूनों की नियमित सफाई भी जरूरी है क्योंकि बढ़ते रहने पर उनमें मैल इकट्ठा होता रहता है।
पैर: हाथों की तरह ही पैर भी रोज साफ करने के बावजूद गंदे रह जाते हैं। खासकर तलवों और घुटनों की रोजाना ब्रश से सफाई करनी चाहिए। घर में होने पर हल्के सोल वाली चप्पल का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है, जिससे पैरों पर दबाव कम पड़ता है और वे गंदे भी कम होते हैं। इसके साथ ही कभी-कभी नंगे पैर चलना भी पैरों के लिए फायदेमंद रहता है।
कुहनी और घुटना: इन दोनों हिस्सों को हम सहारे के लिए किसी सतह पर सबसे ज्यादा टिकाते हैं। ये लचीले होते हैं इसलिए यहां की स्किन पर ज्यादा तनाव रहता है, जिसके लिए इसका मुलायम होना जरूरी है, इसलिए वैसलीन या लोशन लगाते समय इन हिस्सों का खास खयाल रखना चाहिए।
होंठ:- चेहरे पर गुलाबी होंठ आपकी खूबसूरती पर चार चांद लग देते हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि आपके होंठ गुलाबी हो जाएं तो इसके लिए आपको घर पर ही चीनी और नारियल के तेल को मिलाकर लगाना चाहिए।
तेल मालिश... नाभि से गंदगी को साफ़ करने के लिए आप गर्म तेल की मालिश भी कर सकते हैं। गर्म तेल से इस हिस्से में जमा गंदगी को आराम से साफ करने में मदद मिलती है। इसके लिए अपनी बेली बटन में नारियल का तेल लगाएं और उसे क्लॉकवाइज और एंटीक्लॉकवाइज डायरेक्शन में साफ करें। यहां की स्किन को आराम से पकड़ें और कॉटन स्वैब से अच्छी तरह क्लीन करें।
इन्फेक्शन होने पर ऐसे करें साफ...अगर आपके बेली बटन में पहले से इन्फेक्शन हो गया है, तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि वो गंदगी और जमे हुए मैल को हटाने के लिए और इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए सही उपकरण का इस्तेमाल कर सके.
इन सबके साथ ये खयाल भी रखें कि नहाना केवल सुबह की एक आदत या रूटीन का हिस्सा भर नहीं है। हम पूरे शरीर की सफाई और ताजगी के लिए नहाते हैं। गर्मियों में तो कई लोग दिन में दो बार (सुबह और रात में) नहाते हैं। इसलिए नहाते समय पूरे शरीर की सफाई की बात ध्यान में रखें। अगर किसी अंग की देखरेख महीने में एक बार बेहतर ढंग से करेंगे तो उस पर नकारात्मक चिन्ह दिखने की ज्यादा आशंका है। इस लिए रोज नहाते समय एक मिनट ज्यादा देकर पूरे शरीर को अच्छी तरह साफ करें। नहाने के बाद केवल चेहरे पर क्रीम लगाने की बजाय सारे अंगों पर लोशन या स्किन क्रीम लगाने की आदत डालें।
देखा जाए पसीना, मूत्र या मल से भिन्न, माहवारी के रक्त में कोई विषैला तत्व नहीं होता है । इसलिए यह अशुद्ध, हानिकर रक्त नहीं है । माहवारी का रक्त कुछ और न होकर गर्भाशय का अंडा एवं भीतरी परत होता है, जो उस समय बाहर आता है, जब महिलाएं गर्भवती नहीं होती हैं । इस प्रकार यह गंधहीन होता है । परन्तु जब यह शरीर से बाहर आ जाता है तथा कपड़ा/पैड एवं हवा के संपर्क में आता है, तो रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं जिससे गंध उत्पन्न होती है । यह उन कारणों में से एक है जिसकी वजह से महिलाओं को बार-बार अपना पैड बदलना चाहिए ।
लडकियाँ अक्सर शर्म और लज्जा के कारण इस दर्द को भी सह लेती है, इसलिए पीरियड्स से संबधित बहुत सारी गलतफहमियाँ पैदा हो चुकी है जिनका निस्तारण करना बहुत जरुरी है। महिलाओं को पीरियड्स के दौरान कई चीजों से दूर रखा जाता है, उन्हें पूजा-स्थल पर जाने की मनाई होती है, वे अपना खाना भी अलग खाती है। इस वजह से महिलाएं खुद को अपवित्र मानने लगती है। इसमें उनका दोष नहीं है, सारा दोष समाज का है जिसने पहले से यह धारणा बना रखी है की मासिक धर्म मतलब महिलाओं को सबसे अलग रहना है। शर्मिंदगी और डर की वजह से महिलाएं आज भी पीरियड्स के दौरान अपन स्वास्थ्य की देखभाल नहीं करती है। आज भी कई सारी महिलाएं खासकर गाँव में पीरियड्स के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती है। बाद में ना वे उस कपड़े को धोती है और ना ही सुखाती है जिससे जीवाणु पैदा हो जाते है और दोबारा इस कपड़े का इस्तेमाल करने से कई सारी जानलेवा बीमारी की चपेट में आ जाते है। इसलिए पीरियड्स के दौरान स्वच्छता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरुरी है। आईये जानते है पीरियड्स के दौरान साफ़-सफाई का ध्यान कैसे रखें?
महावारी के समय में लड़कियां कुछ ज़्यादा तुनकमिजाज़ हो जाती हैं लेकिन वो इससे अपनी तरह से निपटने की पूरी कोशिश भी करती हैं। लेकिन एक मिनट पर खुश होना, कुछ गुनगुनाना और अगले ही पल गुनगुनाते हुए एकदम से चिड़चिड़ाने लगना, रो देना, दुखी होना, इन सब चीज़ों से निपटना लड़कियों के लिए बहुत मुश्किल होता है। कुछ महिलाएं तो पीरिएड्स के दौरान में डिप्रेशन में चली जाती हैं। लड़कियां भी इस बात को लेकर असमंजस में रहती हैं कि उनके साथ ऐसा क्यों होता है? उनके लिए भी ये अबूझ पहेली की तरह ही होता है। इसके पीछे काफी हद तक हॉर्मोंस का हाथ होता है। माहवारी के दौरान लड़कियों के शरीर में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का स्राव सबसे ज़्यादा होता है।
पैड रैश से ऐसे करें बचाव- अधिक बहाव वाले दिनों में आपको पैड रैश की समस्या हो सकती है। अगर पैड बहुत देर तक गीले रहें तो जांघों के साथ घर्षण से पैड रैश हो जाता है। इससे बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें। अगर रैशेज हो गए हैं तो बार-बार पैड चेंज करते रहें। नहाने और सोने से पहले एंटीसेप्टिक मरहम लगाएं। इससे आपको आराम भी मिलेगा और त्वचा को छिलने से भी बचाया जा सकेगा। अगर स्थिति गंभीर हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें जो आपको किसी मेडिकेटेड पाउडर की सलाह देगा।
एक ही तरीके का सैनिटेशन अपनाएं- कुछ लड़कियां जिन्हें पीरियडस के दौरान बहुत अधिक फ्लो होता है वो एकसाथ दो पैड या एक टैम्पोन और एक पैड या कपड़े के साथ एक पैड का इस्तेमाल करती हैं। ये शायद उन्हें एक अच्छा तरीका लगता हो लेकिन ये तरीका बिल्कुल सही नही है। इस तरह के तरीके से शायद आपके पैड का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं होता और आपको पैड बदलने के लिहाज से भी कोई सहूलियत नहीं मिलती। इससे आपको रैशेज और इंफेक्शन हो सकता है और अगर टेम्पोन इस्तेमाल कर रही हैं तो टीएसएस का भी खतरा हो सकता है। अगर आप पैड के साथ किसी कपड़े का इस्तेमाल कर रही हैं तो उस कपड़े का साफ होना बहुत ज़रूरी है क्योंकि कपड़ा साफ नहीं होने पर वह आपके प्राइवेट एरिया को नुकसान पहुंचा सकता है। जबकि एकसाथ दो पैड इस्तेमाल करना असुविधाजनक हो सकता है जिससे आपको रैशज हो सकते हैं और आपका मूड भी चिड़चिड़ा हो सकता है। लाखों छात्राएं माहवारी के दिनों में तीन से पांच दिन सिर्फ इस वजह से स्कूल नहीं जा पाती हैं क्योंकि उनके लिये सेपरेट शौचालय और पैड निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से एक वर्ष में एक महीने से ज्यादा उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है । एक आंकड़े के अनुसार करीब 33 प्रतिशत छात्राएं माहवारी के दिनों में स्कूल नहीं जाती हैं।
लगभग सभी हर महीने मासिक धर्म की अवस्था से गुजरती हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश को पीरियड्स के दौरान हाइजिन मेंटेन करने और अपनी देखभाल करने के बारे में न तो जानकारी है और न ही इससे जुड़े संसाधन उपलब्ध हैं। माहवारी के दौरान मन अजीब रहता है और कुछ खाने का मन नहीं करता लेकिन इस समय खाने को छोड़ना हानिकारक हो सकता है। एक साथ नहीं खाने का मन है तो दिन में दो-तीन बार थोड़ा-थोड़ा खाएं। इससे आपके शरीर का ब्लड शुगर लेवल स्थिर होगा। खून में शर्करा की मात्रा में उतार-चढ़ाव से भी कुछ लड़कियों को चिड़चिड़ाहट हो सकती है इसिलए खाना न छोड़ें। मासिक धर्म में व्यायाम नहीं करना चाहिए लेकिन अगर महिलाएं व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें तो यह दिमाग और शरीर दोनों के लिए अच्छा होता है। योगा करना ज़्यादा अच्छा होता है क्योंकि इससे दिमाग शांत रहता है। व्यायाम करने से शरीर में एंड्रोफिन रसायन का स्राव होता है जो आपकी खुश करता है।
लडकियाँ आज भले ही लडकों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हों, आधी आबादी की एक चौथाई से ज्यादा लडकियाँ आज भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। लोअर क्लास फैमिली की लडकियाँ पैड यूज नहीं करती, क्योंकि एक तो वे इसे खरीदने में सक्षम नहीं हैं और दूसरी बात अपने लिए पैड खरीदने वे बाहर नहीं जा सकती, न ही उनके परिवार उन्हें इसकी अनुमति देते हैं। तीसरी और सबसे बड़ी बात यह उनको नहीं पता है कि सैनिटरी पैड क्या है? इन लडकियों को यह नहीं पता है कि सैनिटरी पैड माहवारी के समय स्वच्छता बनाये रखते हैं और माहवारी के दौरान होने वाले संक्रमण से भी बचाते हैं।
कई बार इंफेक्शन इतना बढ़ जाता है कि लडकियाँ असमय काल का ग्रास बन जाती हैं। आज भी महिलाओं को अपनी उन समस्याओं को समाज से छिपाना पड़ता है, जिन्हें यही समाज पवित्र और कामाख्या देवी का आशीष मान अपने घर के पूजा स्थलों में रखता है। ग्रामीणों को छोड़िए आज भी शहरी इलाकों की महिलाएं भी सैनिटेशन की समस्याओं से जूझ रही हैं। पीरियड्स के दौरान शरीर में बैक्टीरिया के फैलने का खतरा ज्यादा ही बना रहता है। क्योंकि तेजी से हो रही ब्लीडिंग के दौरान अंदर काफी नमी आ जीत है। जिससे संक्रमण के खतरे बढ़ने लगते है। फिर चाहे आपका रक्तस्राव कम हो रहा हो या इससे अधिक।  काफी समय तक एक ही पैड का उपयोग करने से संक्रमण काफी तीव्र गति से फैलता है। जिससे शरीर में छाले और इन्फेक्शन के बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। शरीर को इस समय सुरक्षित रखने के लिए ऐसे सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करे, जो गीलेपन को अच्छी तरह सोख कर जैल में परिवर्तित कर दे और साथ ही शरीर को स्वच्छता बनाए रखने में सहायक हो।
1-    अपनी योनि को हमेशा साफ सुथरा रखें-
पीरियड्स के दौरान अपने शरीर की काफी देखभाल करने की आवश्कता होती है। साथ ही साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना होता। इन दिनो में अगर आप सफाई पर ध्यान नहीं दोगी तो आपको रैशेज की समस्या पैदा हो सकती हैं। आप हमेशा वॉश रुम में जाकर योनि की साफाई करें और उसके साथ ही अपने हाथों को भी अच्छी तरह से बैक्टिरीया मुक्त साबुन का प्रयोग करके साफ करें। इसके साथ ही इन दिनों हर रोज नहाना भी चाहिए। इस दौरान शरीर की सफाई को देखते हुए यदि आप चाहें तो इन दिनों में दो बार भी नहा सकती है। इन दिनों आप जितनी सफाई से रहेंगी उतना ही आपके लिए सही होगा क्योंकि सफाई न होने की वजह से आपको इंफेक्शन भी हो सकता है |
2-    शावर का उपयोग करें-
पहले समय में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के स्नान ना करने की सलाह दी जाती थी क्योंकि इस समय लोग नदी या तलाब में स्नान के लिए बाहर जाते थे, पर आज के समय में शरीर को संक्रमण से बचाने के लिए इन दिनों में स्नान नियमित रूप से करना चाहिये। इसके लिए यदि आप शॉवर का उपयोग करेगी तो यह आपके शरीर के लिए काफी अच्छा परिणाम देता है। इससे शरीर साफ होने के साथ ताजगी का एहसास दिलाता है। गुनगुने पानी से स्नान करने से मासिक धर्म के दौरान होने वाली ऐंठन, पीठ दर्द और सूजन से छुटकारा मिल जाता है।
लडकियाँ जननांगों में पीरियड्स के पहले या बाद, कई बार सफेद स्राव (व्हाइट डिस्चार्ज) या फिर गीलेपन से बचने के लिए टेलकम पाउडर आदि का इस्तेमाल करती हैं, जो कई बार प्राइवेट पार्ट के जरिए अंदर भी चला जाता है और बीमारी की वजह बन सकता है। "ऐसे किसी उत्पाद का शरीर के अंदरूनी भागों से बिल्कुल संपर्क नहीं होना चाहिए। प्राइवेट पार्ट पर खुजली या फंगस आदि की समस्या है तो उसके लिए मेडिकेटेड (औषधीय) पाउडर आते हैं। डॉक्टर हमेशा आगाह करते हैं कि ऐसे उत्पादों को नाक-मुंह में भी अंदर न जाने दें l
बाहर की सफाई तो सभी प्रतिदिन करते हैं और अधिक सजग रहते हैं कि हम सुंदर दिखाई दें, इसलिए सुंदर लगने के लिए कई आर्टिफिशियल सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग भी करते हैं पर अंदरुनी अंगों की सफाई के लिए सभी लोग उतने सजग नहीं है जितने कि बाह्य सफाई के लिए। बाह्य अंगों की नियमित सफाई से ज्यादा आंतरिक अंगों की सफाई का होना आवश्यक है क्योंकि शरीर के वे अंग जिनसे शरीर की मैल, गंदगी, मल मूत्र विसर्जित होते हैं यदि उनका ध्यान न रखा जाए तो कई प्रकार के रोग शरीर को लग जाते हैं जैसे खुजली, सूजन, जलन, बदबू आदि । लडकियों को अपनी वेजाइना की सफाई का विशेष ध्‍यान रखना चाहिए। क्योंकि इस अंग की सफाई के दौरान की गई लापरवाही कई प्रकार के इन्फेक्शन का कारण बन सकती है। जी हां बॉडी को हेल्‍दी रखने और हानिकारक बैक्टीरिया से बचाए रखने के लिए प्राइवेट पार्ट को हेल्‍दी रखना बहुत ही जरूरी है। वेजाइना की रेगुलर सफाई ये सुनिश्चित करती है कि आपकी वेजाइना कितनी हेल्‍दी और क्‍लीन रहती है। आपको बता दें कि वेजाइना के पास कुछ बैक्टीरिया होते है जो नुकसान नहीं पहुंचाते है लेकिन अगर उस जगह की सफाई ठीक से नहीं की जाए तो ये बैक्टीरिया बढ़ सकते है जो आपके स्किन के लिए और वेजाइना के लिए अच्छे नहीं है। लेकिन कुछ महिलाएं वेजाइना की सफाई के दौरान कुछ ग‍लतियां करती हैं जिससे पीएच बैलेंस बिगड़ जाने से कई प्रॉब्‍लम हो सकती हैं। वेजाइना बहुत ही नाज़ुक अंग है। किसी भी केमिकल के इस्‍तेमाल से इनका नेचुरल पीएच बैलेंस बिगड़ जाता है। जी हां वेजाइना की दीवारें इतनी पतली और नाजुक होती हैं कि क्‍लीनिंग प्रोडक्‍ट का इस्तेमाल इनमें सूक्ष्म दरारें पैदा कर सकता है जिनसे बैक्टीरिया वाली बीमारियों की खतरा बढ़ जाएगा। शरीर के अंगों को बनाया ऐसे गया है कि वे अपना निर्वाह कर सकें, महिलाओं को निजी अंग को किसी तरह डाउचिंग की जरुरत नहीं, उसके लिए साफ पानी काफी है। इसमें कोई शक नहीं है कि स्वच्छता सर्वोपरि है, और हर लडकी खुद को साफ रखती है। लेकिन आपकी वेजाइना को साबुन से साफ करना अच्‍छी बात नही है। बस पानी से साफ करना पर्याप्त है। साबुन में मौजूद केकिमल अगर आपकी वेजाइना में चले जाते है तो नेचुरल पीएच बैलेंस को बिगाड़ कर आपकी वेजाइना को अनावश्‍यक रूप से ड्राई और खुजली वाला बना देता है। लडकियों को पता होना चाहिए कि वेजाइना एक स्व-सफाई तंत्र है जो सूक्ष्म जीवों के विकास को रोकने के लिए वाइट म्‍यूकस पैदा करता है। इसलिए इसकी सफाई के दौरान कुछ बातों को ध्‍यान में रखना बेहद जरूरी है। आइए ऐसी ही कुछ बातों के बारे में जानें.
यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि अस्वच्छता से उत्पन्न होने वाले ये रोग लडकों की बजाए लडकियों को अपनी गिरफ्त में जल्द लेते हैं। नारी की शारीरिक बनावट जिस तरह की है, उसमें उसके लिए साफ-सफाई से रहना और भी जरूरी हो जाता है। लड़कियां विशेषकर मूत्र संक्रमण की विकृति का शिकार होती हैं। कुछ तो इसे समझ नहीं पाती और जो समझ भी पाती हैं वो लोक-लाज में इसे व्यक्त करने की स्थिति में नहीं रहती हैं। जिसे समाज में गुप्त रोग कहते हैं, इन रोगों की एक बड़ी वजह साफ-सफाई का ध्यान ना रखना ही है। साफ-सफाई का ख्याल ना रखने के कारण डेसीलस कोलाईनामक जीवाणु उत्पन्न होकर योनि मार्ग द्वारा शरीर के अन्दर प्रवेश जाते हैं और अनेक बीमारियों का कारण बनते हैं। कई बार ऐसा देखने को मिला है कि अस्वच्छता के कारण लड़कियों के हार्मोन्स असन्तुलित हो जाते हैं, जिसके कारण कई और बीमारियों के उत्पन्न होने की आशंका बढ़ जाती है। उपरोक्त जिवाणुओं की संक्रमण गति बहुत ही तीव्र होती है और ये लड़कियों के शरीर में बहुत तेजी से फैलते-बढ़ते हैं। इसकी भयावहता का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह रजोवृत्ति के बाद प्रौढ़़ा अवस्था में पहुँच चुकी महिलाओं में भी मूत्र सम्बन्धी विकृति पैदा करते हैं।
आम तौर पर 10 से 16 वर्ष में एक मानव शरीर में यौवन शुरू होता है। यह एक बच्चे की परिपक्व होने की क्रमिक प्रक्रिया है। प्रत्येक व्यक्ति में समय-समय पर परिवर्तन होते रहते हैं। शरीर, व्यवहार, और जीवन शैली में परिवर्तन उनमें से कुछ हैं। इस प्रक्रिया के दौरान होने वाले परिवर्तन शरीर, हाथों, पैरों और कमर के आसपास दिखाई देते हैं। शरीर के यौन अंग बड़े होते हैं और हार्मोन का उत्पादन शुरू होता है। त्वचा का और अधिक विकास हो सकता है.
शरीर की अच्छी तरह से देखभाल की कुछ आवश्यक, सरल और बुनियादी बातें..
एक लडकी जब युवा होती है, तो उसे अधिक पसीना आना शुरू हो सकता है। इसलिए नियमित रूप से स्नान द्वारा त्वचा साफ और शरीर की गंध को दूर रखना आवश्यक है। दंत क्षय (गुहाओं) से बचने के लिए व और तरो-ताजा साँस के लिए कम से कम दिन में दो बार दांत साफ करें। तेल ग्रंथियों से अधिक सीबम (एक तैलय पदार्थ) का उत्पादन होता है जो मुहांसों के रूप में विकसित हो सकता है। मुहासे किशोरावस्था उम्र में बहुत ही सामान्य होते हैं, और उनसे पूरी तरह से बचने का कोई उपाय नहीं है। त्वचा को साफ रखना ही सबसे अच्छा समाधान है.
अक्सर फूलों जैसी त्वचा और गुलाबों सी खुशबू वाले उत्पादों के विज्ञापन होते ही इतने कलात्मक और मर्मस्पर्शी हैं कि वो अपना असर छोड़ जाते हैं। शायद यही वजह है कि भारत के उन गांवों में जहां महिलाएं सेनेटरी नेपिकन का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं उन कस्बों और छोटे बाजारों में इंटीमेंट वॉश जैसे उत्पाद दिख जाएंगे। मेडिकल स्टोर, ब्यूटी पार्लर से लेकर जनरल स्टोर तक पर ये देखने को मिलने लगे हैं। "जनांग को शारीरिक सम्बन्ध के लिए रेप्रेसेंटेबल बनाने का कॉन्सेप्ट बिलकुल अनभिज्ञ या बेसंगत है। लोगों की विचारधाराओं और प्यार की परिभाषा में अब अजीब सा बदलाव आ गया है। अपने दोस्तों से सुनकर कोई भी उत्पाद इस्तेमाल न करें। यह काफी हद तक कमर्शियल मार्केटिंग का नतीजा है, फिर चाहे ये टेलीविज़न, इंटरनेट के विज्ञापन के ज़रिये हों या मेडिकल एथिक्स के खिलाफ जाकर डॉक्टर द्वारा दिए गए के इस्तेमाल की सलाह के।" मनोवैज्ञानिक इसे ही माइंडगेम कहते हैं। "अब छोटे शहरों और गांवों में भी मेडिकल स्टोर्स पर वजाइना वाश उपलब्ध हैं। हालांकि अभी ऐसी जगहों पर इनकी मांग ज्यादा नहीं है। समस्या इसलिए भी गंभीर हो सकती है क्योंकि भारत में अभी तक माहवारी के बारे में खुल कर बात करने में लोग संकोच करते हैं तो गुप्तांगों में आने वाली समस्याओं के लिए डॉक्टर के पास पहुंचने वाली की संख्या कितनी होगी अनुमान लगाया जा सकता है।
नाजुक अंगों पर वैक्सिंग भी खतरनाक है। शरीर के अन्य भाग जैसे हाथ और पैरों की वैक्सिंग के लिए तो सभी उम्र की लड़कियां करवाती हैं शरीर के बालों के साथ समय-समय पर प्यूबिक बालों को क्लिप करना यानि कैंची से सावधानी से काटना ज़रूरी है, लेकिन ब्यूटी सैलून या पार्लर में ऑफर की जाने वाली ब्राज़ीलियन वैक्सिंग या वजाइनल व्हॉइटेनिंग काफी नुकसानदेह है। "ब्राज़ीलियन वैक्सिंग, वजाइनल व्हॉइटेनिंग, हेयर रिमूवल क्रीम या रेजर, सभी जननांग के लिए खतरनाक हैं।" ऐसे किसी भी उत्पाद का प्रयोग करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरुर लेना चाहिए। किसी भी तरह से वजाइना वाश, पाउडर या गुप्तांगों के डीओ या परफ्यूम से बचें, यह सब वजाइना के अंदर जाकर शरीर के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।
प्यूबिक बालों को सिर्फ ट्रिम करें, सावधानी से कैंची का इस्तेमाल करें। हेयर रिमूवल क्रीम और रेजर से दूर रहें। दिन में दो बार स्नान करें या अपने गुप्तांगों को धुलें। इस तरह वजाइना स्वस्थ्य और बदबू से मुक्त रहेगी। माहवारी के दौरान सेनेटरी नैपकिन को कम से कम दिन में तीन बार बदलें और गरम पानी से स्नान करें। पेशाब करने के बाद वजाइना को टॉयलेट पेपर या टिशू पेपर से साफ करें। घर और दफ़्तर, दोनों जगहों पर टॉयलेट की सफाई सुनिश्चित करें। बियर और मसालेदार भोजन से बचें और अधिकतम हरी सब्ज़ियों, अनानास, बैरी व अन्य फलों का सेवन करें, योनि में दुर्गन्ध स्वाभाविक रूप से कम हो जाएगी।
नाभि हमारे बॉडी के सेंसेटिव पार्ट में से एक है। हम में से कई लोग है जो पर्सनल हाइजीन में नाभि की साफ सफाई में शरीर की दूसरे अंगों की तुलना में कम ही ध्‍यान देते है। जब कि आपको मालूम होना चाहिए कि नाभि की साफ सफाई बेहद जरुरी है। इसकी सफाई को नजरअंदाज करना मतलब इंफेक्‍शन और बैक्‍टीरिया की चपेट में आना जैसा है। दिनभर तंग कपड़ों में रहना, धूल और पसीने की वजह से हमारी नाभि दिन भर कई कीटाणु के सम्‍पर्क में आती है। इसलिए बॉडी के दूसरे अंगों की तरह ही नाभि की भी सही से साफ करना बहुत जरूरी है। आपको बता दें कि नाभि की सही देखभाल नहीं करने से आपको ओफ्लेमिटिस की समस्या हो सकती है। आइए जानते है कि शरीर के इस नाजुक अंग की साफ सफाई करते हुए किन बातों का विशेष ध्‍यान रखना चाहिए।
देश के भविष्‍य की दृष्टि से एक नारी का शरीर एक मंदिर के तौर पर बहुत महत्‍वपूर्ण है। नई पीढ़ी को स्‍वस्‍थ बनाने के लिए नारियों का परिवार, समाज और राष्‍ट्र पर हितकारी प्रभाव होता है क्‍योंकि प्रत्‍येक नारी को अपने चुने हुए क्षेत्र, माता और शिक्षक तथा सामूहिक मूल्‍यों के संरक्षक के नाते पेशेवर रूप में बहुत प्रकार के कार्य करने पड़ते हैं। मातृ मृत्‍युदर कम करना और वंचित परिवेश से आने वाली लडकियों के पोषण स्‍तर में सुधार लाना, मां और बच्‍चे के विकास कार्यक्रमों में मजबूती लाना जैसे क्षेत्र मुख्‍य हैं। इसके अलावा नई राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य नीति प्रजनन स्‍वास्‍थ्‍य, एनीमिया और जीवन शैली के कारण होने वाले अनेक गैर-संचारी रोग की समस्‍या का समाधान होना चाहिए l दुबला पतला रहने के लिए अधिक से अधिक कसरत करने और आधा भूखा रहने जैस प्रचलित मिथकों के बारे में सचेत रहना चाहिए l जब लडकियों का शरीर  हार्मोंन परिवर्तन के दौर से गुजर रहा हो और उसे ऊर्जा की लगातार जरूरत हो तो जीवन के इस चरण में ऐसा करना बहुत खतरनाक है। बीमारियों से प्रतिरोध बनाने के लिए रोजाना निर्धारित समय पर पर्याप्‍त कैलोरी युक्‍त संतुलित भोजन लिया जाना चाहिये । इसलिए जंक फूड का त्‍याग करना भी बहुत आवश्‍यक है। हर लड़की अपना खेल प्रोफाइल बढ़ाने और स्‍वस्‍थ रहने के लिए खेलों में भाग ले। खेल मानसिक और शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य को सुनिश्चित करता है.
विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस (Menstrual Hygiene Day) हर साल 28 मई को मनाया जाता है जिसका मुख्‍य उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों को पीरियड्स से जुड़े प्रबंधन के बारे में सही जानकारी देना है। देखा जाता है कि लड़कियां मासिक धर्म से जुड़ी बातों के बारे में खुल कर बात करना पसंद नहीं करती। पीरियड्स के दिनों में लड़कियां शारीरिक और मानसिक तकलीफों से गुजरती हैं। ऐसे में शरीर में काफी हार्मोनल चेंज भी आते हैं, जिसकी वजह से हर लड़की को अपनी साफ-सफाई का पूरा ध्‍यान रखना चाहिये। यदि इन दिनों में सफाई का ध्‍यान न रखा गया तो वैजिनल इन्फेक्शन के साथ साथ इनफर्टिलिटी से भी जुड़ी समस्‍याएं हो सकती हैं l इस Menstrual Hygiene Day के दिन चलिये जानते हैं पीरियड्स के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के लिये लड़कियों को क्‍या-क्‍या करना चाहिये। माहवारी के दौरान अगर हाइजीन का ध्यान न रखा जाए तो स्किन इरिटेशन हो सकता है जिससे dermatitis हो सकता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें स्किन में सूजन आ जाती है, स्किन लाल हो जाती है और कई बार फोड़े और फुंसियां भी हो जाती हैं. लडकियों को समाज में लिंगभेद के साथ-साथ जैविक संरचना के कारण साफ-सफाई के मोर्चे पर भी जूझना पड़ता है।
"हमारे यहां लड़कियां इसको गंभीरता से नहीं लेती। माहवारी में होने वाले दर्द को सहन करने की आदत डाल लेती हैं। यही कारण हैं कि उन्हें पता नहीं चल पाता कि ये एक बीमारी भी हो सकती है।"
लड़कियों को चाहिए कि वह नियमित रूप से साफ सफाई रखें। कपड़ों को गर्म पानी में धुलने के साथ ही उन्हें उल्टा करके सुखाएं। सप्ताह में एक बार दवाई लें और व्यक्तिगत साफ सफाई पर विशेष ध्यान दें। साथ ही हरी सब्जियों, प्रोटीनयुक्त आहार, खाने में सलाद को शामिल किया जाना चाहिए। नियमित रूप से योगा और अन्य व्यायाम भी करना चाहिए । जिससे शादी के बाद कोई दिक्कत नहीं होती और शरीर में अच्छे हारमोन बढ़ते हैं.
लडकियों को चाहिए भोजन करने के बाद दांतों की अच्छी तरह से सफाई जरूरी है। सुबह और रात को सोने से पहले ब्रश अवश्य करना चाहिए । इसके बाद सोने तक कुछ नहीं खाना चाहिए इसके साथ ही जंक फूड जैसे चाऊमीन, स्प्रिंग रोल, बर्गर, मंचूरियन आदि का भी कम से कम सेवन करना चाहिए l
माहवारी के दौरान साफ़-सफाई का समुचित प्रबंधन होना अति आवश्यक है...
पहली बार माहवारी आने पर लड़कियों को शिक्षित करने के साथ साथ ही  उनको बार-बार आश्वस्त करना चाहिए कि माहवारी के कठिन दिन कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है l माहवारी के दौरान सेनिटरी पैड/नैपकिन का प्रयोग करना चाहिए 6 से 8 घंटे में एक बार नियमित रूप से सेनिटरी पैड/नैपकिन को बदलना चाहिए | बैक्टीरिया से संक्रमण को रोकने के लिए पैड/नैपकिन बदलने से पूर्व एवं इसके बाद समुचित रूप से हाथ धोना चाहिए.
माहवारी के दौरान क्या करें व क्या न करें...
1-    घर, स्कूल में तथा कार्य के स्थान पर सभी सामान्य कार्य करना (खाना पकाना, नहाना, समारोहों में भाग लेना आदि)|
2-    हमेशा की तरह सामान्य भोजन करना |
3-    लंबे समय तक या अधिक रक्तस्राव होने, ऐंठन होने, पीरियड न आने जैसी समस्याओं के मामले में डॉक्टर से परामर्श लेना |
4-    उपयोग किये जा चुके सेनेटरी पैड को अलग करना, ढक्कन वाले किसी डस्टबिन में उसे डालना और अंतत: गाड़कर, कंपोस्टिंग, जलाकर उसका निस्तारण करना |
5-    समय-समय पर सेनेटरी नैपकिन बदलें
6-    पीरियड्स के दौरान लंबे समय तक एक ही सेनेटरी नैपकिन पहनने से योनि संक्रमण हो सकता है। आपको हर 5 घंटे में पैड बदलना चाहिये। वहीं अगर आप टैम्पान पहनती हैं तो उसे हर 2 घंटे में बदलें। यह नियम कम व अधिक बहाव दोनों प्रकार के दिनों में करना है।
7-    मासिक धर्म के दौरान आपको अपनी योनि की सफाई पर पूरा ध्‍यान रखना चाहिये। इससे योनि की गंध को भी मिटाया जा सकता है।
8-    मासिक धर्म के दौरान गर्म पानी से स्‍नान करने पर शरीर की थकान मिटती है और ताजगी आती है। यही नहीं इससे शरीर में आने वाली दुर्गंध भी दूर होती है।    
9-     जब भी आप पीरियड्स पर हों, अपनी बेडशीट को नियमित धोएं। यही नहीं आपको अपनी अंडवेयर भी बदलते रहना चाहिये जिससे आप संक्रमण और खुजली से बच सके
10  पीरियड्स के दिनों में अपने पास अलग से कुछ अंडरवियर रखें। इन्‍हें तभी पहने जब आप पीरियड्स पर हों। इन्‍हें डिटॉल की मदद से अन्‍य कपड़ों से अलग धोएं
11  जब भी प्राइवेट पार्ट की सफाई करें, गुनगुने पानी का ही प्रयोग करें, बहुत ज्‍यादा गर्म पानी के इस्‍तेमाल से बचें। साथ ही जब भी बाथरूम जाएं, वेजाइना को टिशू पेपर से साफ करें, कपड़े का प्रयोग बिलकुल भी न करें, उसमे कई प्रकार के बैक्टीरिया हो सकते हैं।
12  वेजाइना खुद को बैक्‍टीरिया और इंफेक्शन से बचाने के लिए एक उचित तपमान, पीएच और नमी को बनाए रखने में मदद करती है। आमतौर पर, वेजाइना का पीएच नॉर्मल रहता है लेकिन कठोर साबुन या केमिकल युक्‍त प्रोडक्‍ट के इस्‍तेमाल से काफी बदल सकता है। इसलिए वेजाइना को साफ करने के लिए केमिकल युक्त प्रोडक्‍ट का इस्‍तेमाल न करें, इसमें मौजूद केमिकल से इंफेक्‍शन होने की संभावना अधिक रहती है।
13  किसी भी तरह से वेजाइना वाश, पाउडर या वेजाइना के डीओ या परफ्यूम से बचें, यह सब वेजाइना के अंदर जाकर बॉडी के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। जी हां कई बार लगातार पसीना निकलने से प्राइवेट पार्ट से अजीब सी गंध आने लगती है, जिसके लिए महिलाएं परफ्यूम का इस्‍तेमाल करती हैं, लेकिन भूलकर भी इस हिस्से पर परफ्यूम का प्रयोग न करें, इससे इंफेक्‍शन होने का खतरा बढ़ जाता है।
14  रेगुलर वेजाइना के आसपास के बालों को ट्रिम करते रहना चाहिए, इससे खुजली जैसी समस्या नही होती है। जी हां कोशिश करें कि वेजाइना में बाल छोटे हो या फिर नहीं हो। जिससे पसीने से होने वाली खुजली से निजात मिल सके।
15  हमेशा कॉटन से बने अंडरगारमेंट्स ही प्रयोग करें और रोजाना अपने अंडरगारमेंट को बदलें। और उन्हें धोने के बाद धुप में सुखाएं। अपने आप को नमी से बचाएं। गीलें कपड़ों में अधिक समय तक न रहें, अगर आप तैराकी करते हैं या आपको अधिक पसीना आता है तो उन गीले कपड़ों को तुरंत बदल दें। गीले कपड़ों में रहने से बैक्‍टीरिया पैदा होते हैं, जो नमी को बनाये रखते हैं जिससे वेजाइना में बदबू और अन्य समस्याएं पैदा होती हैं
16  मासिक धर्म प्रारम्भ होने से लगभग एक सप्ताह पूर्व योनि के बाल साफ कर लें या उन्हें छोटा कर लें। ऐसा करने से इन दिनों सफाई में आसानी रहती है। - मासिक धर्म के दिनों में जब भी मूत्र त्याग करने जायें, योनि मार्ग को भी अच्छी तरह धो लें। वैसे इस आदत को हमेशा प्रयोग में लाएं तो बेहतर रहता है।
17  -दूसरे लोगों के साथ माहवारी के दौरान प्रयुक्त सेनेटरी के कपड़ों को सांझा न करें |
18  -शौचालय, जलाशयों में या कचरा पेटी में माहवारी के अपशिष्ट को ना डालें |
19  अक्सर हम पीरियड्स के दौरान अलग-अलग ब्रांड के सैनेटरी नैपकीन का इस्तेमाल करते है जबकि यह गलत है। अगर आपको किसी ब्रांड का सैनेटरी नेपकीन सूट ना करें तो उसका इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए अन्यथा आपको तकलीफ हो सकती है।
20  महिलाओं को मासिक धर्म हर महीने होता है इसलिए पीरियड्स के दौरान सैनेटरी नैपकीन के साथ-साथ अन्य जरुरी चीजें अपने पास रखें। टिशु पेपर, हैण्ड वाश, तौलिया, एंटीसेप्टिक दवा, पानी की बोतल और जरुरी खाने पीने की पौष्टिक चीजें अपने पास रखें।
21  गीले पेड से आपकी जांघो पर या गुप्त अंगों पर लाल चकते हो सकते है और इससे संक्रमण का भी डर रहता है इसलिए इन लाल चकतों पर एंटीसैप्टिक मलहम लगायें। इससे जलन से भी आराम मिलेगा और लाल चकते भी दूर होंगे। एक बार ऐसे में अपने डॉक्टर से भी जरुर सम्पर्क करें।

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