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“सपा” सुप्रीमों भेंट करेंगे, बेटे को एक हसीं तोहफा (सच का आइना).

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     “सपा” सुप्रीमों भेंट करेंगे, बेटे को एक हसीं तोहफा (सच का आइना).... बॉक्स...... हालातों को देखते हुए सपा सुप्रीमों ने उत्तर-प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से “दिल्ली पर कब्जे” की मुहिम शुरू कर दी थी. अब सपा सुप्रीमों को उस दिन का इन्तजार है जब “पंजे” को अपनी गिरफ्त में लेते हुए वो उत्तर-प्रदेश के युवराज को एक हशीन तोहफे के रूप में दिल्ली भेंट करेंगे....... लखनऊ {लोकजंग-ब्यूरो} .......... बीजेपी-कांग्रेस की नाजुक होती हालत... देखा जाये तो अभी हाल ही में हुई “सपा” की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में “सपा” सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश सरकार के मंत्रियों की और सपा कार्यकर्ताओं व नेताओं की क्लास लेते हुए उन्हें अच्छे आचरण की नसीहत दे डाली. देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर-प्रदेश में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्तारूढ़ होने के बाद से ही “सपा” राष्ट्रीय राजनीति में अपनी केंद्रीय भूमिका पाने के लिए “अभी नहीं तो कभी नहीं” की मुद्रा में मैदान में आ चुकी है.  और अब   “सपा” सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को जब तक मंजिल...

कांग्रेस का समाजवादी प्रेम (सच का आइना).....

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कांग्रेस का समाजवादी प्रेम (सच का आइना)..... बॉक्स...... एक तो कांग्रेस व मुलायम के प्रेम सम्बन्ध पुराने होने के कारण दोनों ही एक दूसरे की अन्दर तक की बात भली-भांति जानते हैं कि किसे कब कितना कौन सा बटन दबाना है जिससे प्रेम की बगिया महक उठे.... कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का ये प्रेम प्रसंग कोई आज का नहीं है बल्कि बहुत पुराना है. स्वर्गीय राजीव गांधी ने जब देश की बागडोर संभाली और उत्तर-प्रदेश की राजनीति को जातिवाद व बदले की राजनीति में तब्दील होते देखा तभी उनकी नजरें मुलायम सिंह के चार हुई और “अजब प्रेम की गजब कहानी” का उदय हुआ. मुलायम सिंह यादव उत्तर-प्रदेश की राजनीति में दवदबा भी स्वर्गीय राजीव गाँधी के प्रेम के चलते ही बना पाए हालांकि कांग्रेसियों व सपाई कार्यकर्ताओं में सदैव ही छत्तीस का आंकड़ा रहा है. स्वर्गीय राजीव गाँधी के मुलायम समर्थन के मुद्दे पर भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने खूब छाती पीटी परन्तु पार्टी प्रमुख ने समाजवादी प्रेम के वशीभूत होकर अपने कार्यकर्ताओं की सारी दलीलें व् दुहाईयों को दरकिनार कर दिया. लेकिन ऐसा भी नहीं कि कांग्रेस का ये समाजवादी प्रेम एकतरफ...

आपसी फूट,अविश्वास,बिखराव,अनुशासनहीनता का नाम है भाजपा (सच का आईना )

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आपसी फूट , अविश्वास , बिखराव , अनुशासनहीनता का नाम है भाजपा (सच का आईना ) बॉक्स ...... देखा जाए तो भारत में गठजोड़ बनाकर सत्ता संभालने वाली भारतीय जनता पार्टी इन दिनों एक दु:खद अंतर्कलह से ग़ुजर रही है. “ भाजपा ” साख वाले विपक्षी दल के रूप में मात्र एक दिखावा रह गई है.................. ताज तो मिल गया नरेंद्र मोदी को. लेकिन लिपटा है बेशुमार काँटों से. कुछ तो वक्त की चाल से और कुछ राष्ट्रीय राजनीति के दुश्मनों से. अब सामने चुनौती है नरेंद्र मोदी के, कि उनकी बीच भंवर में डगमगाती पार्टी की नैया कैसे पार लगे. अनुशासनहीनता , आपसी फूट , अविश्वास , बिखराव और कार्यकर्ताओं में घनघोर निराशा के बीच “भाजपा” में पनप रहे हैं तरह-तरह के षड्‌यंत्र और “भाजपा” के नेता हैं एक दूसरों के प्रति किये षड्‌यंत्रों से अन्जान. जैसे संजय जोशी से इस्ती़फा लेने के वक्त बैठक में लालकृष्ण आडवाणी और अरुण जेटली के न होने पर सुरेश सोनी का ये कहना कि संजय जोशी कार्यकारिणी में रहें या न रहें , लेकिन नरेंद्र मोदी का रहना ज़रूरी है , क्योंकि नरेंद्र मोदी न केवल गुजरात के मुख्यमंत्री हैं , बल्कि “भाजपा” के ह...

अखिलेश जी जरा सोचिये, राज आपका फिर हिंसा क्यों ???(सच का आईना)

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अखिलेश जी जरा सोचिये, राज आपका फिर हिंसा क्यों ???(सच का आईना) Box…… .. इन नौ माह के कार्यकाल के दौरान राज्य में मानवता शर्मशार हो रही है. क्राइम का ग्राफ बढ़ता जा रहा है. यादवों के बलबूते कानून व्यवस्था बनाये रखना अखिलेश यादव के आगामी भविष्य को खतरे में डाल सकता है .... समाजवादी पार्टी की सरकार आते ही दलितों पर अत्याचार के अंकुर क्यों फूट जाते है. उत्तर – प्रदेश में इन नौ महीनों में दलितों पर अत्याचार की वजह साफ़ दिखाई दे रही है. तमाम कानूनों और जागरूकता के बावजूद दलित समाज पर अत्याचारों का बदस्तूर जारी रहना भारतीय सामाजिक व्यवस्था की अंतहीन त्रासदी बन चुकी है. अखिलेश सरकार में दलितों पर अत्याचार किसी साजिस वश है. या वोट न देने पर डराने का जरिया मात्र है.  इन नौ माह के कार्यकाल के दौरान राज्य में मानवता शर्मशार हो रही है. क्राइम का ग्राफ बढ़ता जा रहा है. यादवों के बलबूते कानून व्यवस्था बनाये रखना ऐसे में अखिलेश यादव क्या कभी दुबारा मुख्यमंत्री बनकर राज कैसे कर पाएंगे.  अखिलेश सरकार के आने के बाद पुलिस में भय है. दबी जुबान में सब विरोध कर रहे है. एक ओर सरकारें दल...

मुझे तलाश है एक लापता युवराज की (सच का आईना)

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                                मुझे तलाश है एक लापता युवराज की (सच का आईना) box……. देखा जाये तो विदेशी संस्कृति में रचा बसा ये युवराज शायद भारतीय संस्कृति में बहिन-बेटियों की इज्जत का आंकलन करने में पूरी तरह से असमर्थ है. वहीँ दूसरी तरफ राजसी ठाठ-बाट में पला ये युवराज भारतीय युवाओं के दिन-प्रतिदिन की समस्याओं से भी पूरी तरह अन्जान है… …… कहने को तो हमारे देश में न तो युवा नेताओं की कमी है न ही युवाओं के मसीहाओं की ही कोई कमी है. परन्तु जब भी युवा अपने ऊपर होने वाले किसी भी जुल्म या मांग को लेकर सड़कों पर उतरते हैं तो ये युवा नेता अमूमन नदारद रहते हैं और युवा शक्ति ज्यादातर पुलिस की लाठी की चोट से सड़क पर कराहती नजर आती है इन पढ़े-लिखे देश के भविष्य पर जानवरों की भांति लाठी भांजने वाले पुलिस बल के जवान एक पल के लिए भी ये नहीं सोचते कि ये बच्चे हमारे ही परिवार के बच्चे हैं दरिंदगी की हद तो तब होती है जब अपने आपको सुरक्षा में मुस्तैद सिद्द करने की होड़ में पुलिस बल के जवान लड़कियों पर भी लाठी चटका...

आखिर क्यों और कब तक होगा ये सब ??(सच का आइना )

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आखिर क्यों और कब तक होगा ये सब ??(सच का आइना ) Sub heading……..... एक बार फिर भारत देश शर्मसार हुआ.. .. Box…… गौरतलब है कि साल दर साल बढ़ते इन अपराधों को लेकर अपनी किस्मत पर रोता देश और उसकी राजधानी दिल्‍ली में रविवार की रात एक बस में एक मेडिकल की छात्रा का गैंग रेप हुआ. ये घिनौना कुकर्म करने के बाद में उन जल्लादों ने खून से लथ-पथ छात्रा और उसके दोस्‍त को बेहोशी और नग्‍न अवस्‍था में चलती हुई बस से नीचे फेंक दिया इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया........... ऐसा नहीं है कि इस तरह के ब्लात्कारिक कांड कभी हुये नही है.हुये हैं पर सरकार और पुलिस प्रशासन की अनदेखी का शिकार होते रहे हैं ये कांड. पर विगत दिनों से जो आवाजें उठ रही है. उसका श्रेय मीडिया और जनता को जाता है. आखिर कब तक जनता इन अपराधों को अनदेखा करती रहेगी. अब वक्त आ गया है जुर्म को जड़ से उखाड़ फेकने का. आवाम की आवाज जब बुलंद होती है तो सियासी तख्ता पलटते देर नहीं लगती .  दिल्‍ली में जगह-जगह इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन किये जा रहे हैं. पुलिस प्रशासन और सरकार की नाकामी को देखते हुये सवाल पर सवाल उठाये जा रहे हैं....

महिला पुरुष की प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि पूरक है(सच का आईना )

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Heading…. महिला पुरुष की प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि पूरक है(सच का आईना ) Sab heading …. ये है सारस्वत सत्य कि स्त्री की सच्ची हार ही स्त्री की सच्ची चिरस्थायी जीत. Box….. महिला-पुरुष समानता हर नारी चाहती है और मैं भी चाहती हूं लेकिन ऐसी समानता नहीं कि जहां घर बनने से पहले उजड़ जाता हो. मैं प्रकृति की नहीं सिर्फ नारी के अधिकारों की समानता चाहती हूँ. सही मायने में महिला-पुरुष की समानता तब होगी जब महिलाओं के जीवन में व्याप्त विसंगतियों को दूर किया जाएगा . पुरुष समाज ही दोषी क्यों ....... जब भी हम महिलाओं के पिछडेपन के लिए दोषीजन की बात करते हैं  तो बेचारा पुरुष समाज हमेशा ही कटघरे में खड़ा नजर आता है. हालांकि ऐसा बिलकुल नहीं है कि पूरा पुरुष समाज ही दोषी हो इसके बावजूद पुरुष समाज को इस प्रकार हमेशा ही अपराधी ठहराने के कारण पर जब हम नजर डालते हैं तो हमारे सामने समाज के कुछ ऐसे अद्रश्य ठेकेदारों के चेहरे नजर आते हैं जो भगवान की अनुपम कृति स्त्री व पुरुष के मध्य लकीर खींचकर हर पल अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं. ये हमेशा स्त्री व पुरुष को एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी सिद्द करने ...

10 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस ( सच का आईना )

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Heading……. 10 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस ( सच का आईना ) sub heading…… बहुत गहरी है हिन्दुस्तान में मानव अधिकार की जड़ें मानवाधिकार मनुष्य को बिना किसी भेदभाव के सम्मान के साथ जीने का अधिकार सुनिश्चित कराता है ! मानव अधिकारों के लिए जारी संघर्ष , इन्सानी अधिकारों की पहचान और वजूद को अस्तित्व में लाने के लिए हर साल 10 दिसंबर को अंतरराष्‍ट्रीय मानवाधिकार दिवस (यूनिवर्सल ह्यूमन राइट्स डे) मनाया जाता है. मानवता के खिलाफ हो रहे जुल्मों-सितम को रोकने और अमानवीय कृत्यों के खिलाफ संघर्ष की आवाज को मुखर करने में इस दिवस की महत्वूपूर्ण भूमिका है ! सही मायने में देखा जाए तो मानवाधिकार एक ऐसा विषय है जो सभी सामाजिक विषयों में सबसे गंभीर है जिसे हम एक तरफा होकर नहीं सोच सकते. पर अपने राजनीतिक या अन्य बुरे मंसूबों को सफल बनाने के लिए मानवाधिकारों का सहारा लेना बिलकुल गलत है. मानव अधिकार जो कि प्रकृति ने मानव को जन्म के समय उपहार स्वरूप प्रदान किये इन मानव अधिकारों को कभी-कभी मूलभूत अधिकार , आधारभूत अधिकार , अन्तर्निहित अधिकार , प्राकृतिक अधिकार और जन्म सिद्द अधिकार भी कहा जाता...