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इंसानियत मर चुकी है, खौफ बढ़ता जा रहा है...

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इंसानियत मर चुकी है , खौफ बढ़ता जा रहा है... इस देश की जम्हूरियत आँखों पर पट्टी , कानों पर ऊँगली और मुंह पर हाँथ धरे बैठी है l ये कैसा हमारे देश का दुर्भाग्य है कि अंधे बनकर लोग इसे मसीहा समझते हैं l जिस शख्स को गुजरात में तड़ीपार घोषित किया गया हो वो भारत के सबसे भ्रष्ट नेताओं में शीर्ष पर बैठा है अपने काले कारनामों के जरिये देश को पतन की ओर धकेल रहा है l अपनी गन्दी पॉलिसी के तहत छांट छांट कर एक से एक अजूबों को यहाँ का सर्वे सर्वा बना दिया है l जो घंटा बजाता था वो दीयों और मूर्ती मूर्ती खेल रहा है l  वो एक स्टेट को क्या दे सकता है  l   जनता जाए भाड़ में , इन्हें क्या फर्क पड़ता है l  ये तो बस आवाम को ऊँचे ऊँचे ख्वाब दिखाकर अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहते हैं l देश में क्या हो रहा है इन्हें इसकी सुध नही है l दिन दहाड़े महिलाओं के साथ बलात्कार व हत्या जैसे अपराध हो जाते हैं फिर भी योगी सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगती l आए दिन महिलाओं पर होने वाले अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इसमें सबसे ज्यादा मामले दुष्कर्म के हैं। इन मामलों की फ़ेहरिस्त बहुत लम्...

मेरी सबसे फेवरिट हस्ती....

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मेरी सबसे फेवरिट हस्ती.... सुनते आ रहे हैं कि नारी के रूप में धरती पर जन्म लेना बड़े ही सौभाग्य की बात है नारी को सारी कलात्मकता , सारे संस्कार और गुणों का ज्ञान होता है , तभी तो नारी अपने आपको दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित कर पाती है ! इसीलिए तो नारी को प्रकृति स्वरूपा कहा जाता है ! हम भारतीय नारियों के मन में आपने निश्चित रूप से एक आदर्श बहू, एक आदर्श बेटी, एक आदर्श पत्नी के साथ-साथ राजनीति में एक “सफल नेत्रत्व” के किरदार को बखूबी निभाया है आपने अपनी इन खूबियों के माध्यम से भारतवर्ष में जन्मी उन प्रतिभाशाली नारियों के इतिहास की चमकती झलक उत्पन्न की है आपने भारतीय नारी के एक ऐसे आदर्शमयी चित्र को फिर से स्थापित किया है जो पिछले कुछ दशकों से बाजारवाद के अंधड़ में कहीं धुंधलाता जा रहा था ! वो कहते है कि ..... हे नारी, तेरे जलवों ने  समुन्दर को भी मथ डाला  उठ गये जो पग तेरे  असम्भव को संभव कर डाला  आधियों की क्या हस्ती है  बवंडर तेरी बैशाखी पे टिक बैठा  फिर इन अधेरों की क्या जुर्रत  है ...

तोता बोलता भी है ...(सच का आइना)

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बॉक्स .....  नाम “ मौन” मोहन जी अब आपने बोलना शुरू किया है तो बोलते ही रहिये भले ही २०१४ के चुनाव में पार्टी को लाभ पहुँचाने के लालच में बोलें......   देखा जाये तो हमारे महान अर्थशात्री व हमारे देश के प्रधानमंत्री  “ मौन मोहन” ने गत दिनों पाकिस्तानी सेना द्वारा नियन्त्रण रेखा पर दो भारतीय सैनिकों (शहीद हेमराज और शहीद सुधाकर) की  बर्बरता पूर्वक की गई हत्या पर एक सप्ताह उपरान्त मौन तोड़ते हुए कहा कि “दो भारतीयों की जघन्य हत्या के बाद पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य नहीं रह सकते. इस वीभत्स घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही होनी चाहिए”. देश में जश्न और बधाई का कारण ये नहीं है कि प्रधानमंत्री जी के इस ब्यान के बाद पाकिस्तान अपने नापाक इरादों पर विराम लगा देगा या भारतीय सरकार अकारण हो रहे देश की संतानों की असमय मृत्यु पर कुछ गंभीर निर्णय लेगी बल्कि देश में उत्साह का माहौल इसलिए है कि हमारे “मौन मोहन” प्रधानमंत्री बोलते भी हैं. पिछले दिनों देश में घटी अनेक घटनाओं और जन-आन्दोलन जैसे बाबा रामदेव का ब्लैक-मनी वापसी पर आधी-रात चोरी छिपे बच्चों, बुजुर्...

सोशल साइटों पर बेहूदी अफवाह ....

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सोशल साइटों पर बेहूदी अफवाह .... फेसबुक सहित कई ब्लॉग साइट पर एक अफवाह तेजी से फैली हुई है कि एक जनवरी 2014 से नोट पर कुछ भी लिखा होने पर बैंक जमा नहीं करेंगे.  लेकिन ये सरासर झूठ है. आरबीआई की एक रिपोर्ट के तहत अब यह झूठ सामने आ गया है. देखा जाये तो गलत सूचना और झूठी अफवाह के लिए बुरी तरह बदनाम सोशल मीडिया ने अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को अपना निशाना बनाया है.  गौरतलब है कि 1 जनवरी से लिखे हुए नोट बाजार में न चलने की अफवाह पर 14 अगस्त को जारी किए गए एक सर्कुलर में आरबीआई ने सभी बैंकों को निर्देश दिया था कि क्लीन नोट पॉलिसी के तहत अगर किसी बैंक के पास कोई ऐसा नोट आता है , जिसपर कुछ लिखा है. तो बैंक उस नोट को किसी भी ग्राहक को नहीं देंगे और ग्राहक को नया नोट इश्यू करेंगे . रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया , लखनऊ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात को खारिज करते हुए कहा है कि एक जनवरी के बाद भी लिखे हुए नोट बैंकों द्वारा स्वीकार किए जाएंगे और उनका मूल्य भी बरकरार रहेगा. आरबीआई ने लिखे हुए नोटों पर रोक लगाने के लिए कोई भी सर्कुलर किसी बैंक को नहीं भेजा है . आरबीआई के अधिकारी...

चक्रवाती तूफान 'लहर' आंध्र में कहर मचा सकता है

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चक्रवाती तूफान ' लहर ' आंध्र में कहर मचा सकता है खतरनाक चक्रवाती तूफान ' लहर ' आज आंध्र प्रदेश पहुंच सकता है. यह चक्रवात कुछ ही घंटों में तटीय आंध्र में दस्तक देकर भारी तबाही मचा सकता है.   इस बीच , दिल्ली से मौसम विभाग ने बताया है कि चक्रवाती तूफान ' लहर ' मछलीपट्टनम से 650 किलोमीटर ईस्ट-साउथईस्ट और काकीनाडा से 600 किलोमीटर ईस्ट-साउथईस्ट की दूरी पर स्थित है और गुरुवार को उसके आंध्र तट पर पहुंचने की आशंका है . एम. महापात्र , साइंटिस्ट (साइक्लॉन वॉर्निंग) के अनुसार यह ' अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान ' है , जिसमें हवाएं 140-150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही हैं . महापात्र ने कहा कि गुरुवार को जब यह काकीनाडा के निकट आंध्र तट पर पहुंचेगा , तो इसकी रफ्तार बढ़कर 150-160 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी . ' लहर ' के कहर से निपटने के लिए आंध्र प्रदेश ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने चार हेलिकॉप्टर मंगवाएं हैं और नैशनल डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स की अतिरिक्त टीमों का भी अनुरोध किया है. चक्रवात ' लहर ...

मौत की खामोश दस्तक / जापानी इंसेफेलाईटिस यानि दिमागी बुखार

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मौत की खामोश दस्तक / जापानी इंसेफेलाईटिस यानि दिमागी बुखार उत्तर-प्रदेश के पूर्वांचल में जापानी इंसेफेलाईटिस का कहर इस साल भी बदस्तूर जारी है. पूर्वांचल में तीन दशक से अपना पाँव पसार चुकी जापानी इंसेफेलाईटिस यानी दिमागी बुखार जिसने अब तक हजारों माताओं की गोद सूनी कर दी है और न जाने कितने अनगिनत घरों के आँगन की खिलखिलाहटों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया है. यहाँ हजारों मासूम कुदरत के इस कहर से असमय ही काल के गाल में समा गए हैं. मेडिकल कालेज में भर्ती मासूमो को गौर से देखें तो मौत के मुहाने पर खड़े इन मासूमो के आँखों से निकलते आंसू इस बात की चीख-चीख कर गवाही दे रहे है , कि ये मासूम अभी जीना चाहते है. लेकिन स्वाइन फ्लू जैसे बुखार को अभियान की तरह रोकने की कोशिश करने वाली सरकार पिछले कई समय से इस दिमागी बुखार की जड़ को समाप्त नहीं कर पा रही है. देखा जाए तो बी०आर०डी० मेडिकल कालेज में भर्ती हजारों मासूम अपनी जिन्दगी से लड़ रहे हैं. लोग दहशत और बेबसी में जीने को मजबूर है ये कालेज गवाह है उन मासूमों का जो इस बीमारी से तड़फ –तड़फ कर दम तोड़ रहे हैं. कितनी माताओं की चीखे रोज इन मासू...

सूबे सहित अन्य चार राज्यों की सीमाएं होंगी सील...

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सूबे सहित अन्य चार राज्यों की सीमाएं होंगी सील... आज एडीजी/आइजी कानून-व्यवस्था राजकुमार विश्वकर्मा ने एनेक्सी के मीडिया सेंटर में पत्रकारों को यह जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में 11 व 19 नवंबर , मध्यप्रदेश में 25 नवंबर , राजस्थान में एक दिसंबर और दिल्ली में चार दिसंबर को मतदान है. और इसीलिए आयोग की गाइड लाइन का अनुपालन करते हुए राज्य सरकार ने सीमा पर पड़ने वाले चार राज्यों छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश , राजस्थान और दिल्ली की सीमा मतदान के 48 घंटे पहले सील करने की तैयारी कर ली है. देखा जाए तो पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर सूबे में सतर्कता बढ़ गयी है. यहां के बार्डर पर बैरियर तैयार कर लिए गये हैं. चुनाव को मद्देनजर रखते हुए यहां सभी संबंधित इलाकों में शराब की बिक्री पर भी रोक लगा दी जायेगी और उसी दिन से ड्राई डे रहने के कारण बार्डर पर शराब की कोई दुकान नहीं खोली जायेगी. अवैध शराब , अवैध शस्त्र फेक करेंसी पर अंकुश लगाने के सख्त निर्देश दिए गये हैं. बार्डर के जिलों के पुलिस अधीक्षक जिन गांवों के लोगों का शस्त्र जमा कराने को कहेंगे , उनके शस्त्र जमा कर लिए जायेंगे. फर्जी सिम ...

हसरत है कि वो देखे एक हसरत भरी निगाह से....

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हसरत है कि वो देखे एक हसरत भरी निगाह से न जाने क्यों आज एहसास हों रहा है कि किसी बेबसी के तहत हमारा रिश्ता कराह रहा है न जाने कब से यही सोचती हूँ हर सुबह, हर शाम, हर पल तुम्हें याद न करूँ लेकिन अपने वादे पे कायम रहने की नाकाम सी कोशिश और रात होते ही नींद के आगोश में अपने ही ख़्वाबों को दरकिनार कर तेरे खवाबों की तह सी बिछाते हुए मेरे एहसास एक अनछुई कोपल से पनपने लगते हैं   और मैं उन सपनों में अथाह गोते लगाते हुए उस पायल की झंकार को महसूस करती हूँ जो तुमने पायल मुझे दी थी वैसे हमने एक बात छुपाई थी आपसे. आपकी दी हुई पायल के घुंघरू टूटकर तो बहुत पहले ही मधुर ध्वनी देना छोड़ चुके थे. और हाँ उन दिनों मुझे भी कहाँ पता चला था कि तेरी प्रीत की चटख का. तुमेह तो पता ही न चला क्योंकि मेरे घुंघरू की खनक तो आप तक वैसी ही पहुँच रही थी जैसे अभी आज ही पहनी हो क्योंकि मैंने तुम्हे कभी महसूस ही नही होने दिया. कि मुझे पता है कि तुम उस पायल के घुंघरू तुमने किसी और के पैरों में संवार दिए थे पर मैंने तो पाने और गंवाने की हर कोशिश तेरे नाम लिख दी थी. जलते-जलते भी यूँ तमाम उम्र तेरे नाम लिख दी...

जरा सोचिये... ये क्या कर सकते है ये तो हमसे भी ज्यादा लाचार हैं....(सच का आइना)

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जरा सोचिये ... ये क्या कर सकते है ये तो हमसे भी ज्यादा लाचार हैं... . ये हैं राहुल ये हमारे देश के भावी प्रधानमंत्री है जो पिछले आठ दिनों से स्पेन में गुलछर्रे उड़ा रहे थे और आज इनको सुध आई है कि इनके देश में आई विपदा के मारे कितने व्यथित और लाचार लोगों को इतनी मुसीबतों का सामना करना पड़  रहा है. उत्तराखंड की सरकार और देश के गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने पिछले दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हवाई सर्वे तक सीमित रखा था। शिंदे ने मुख्यमंत्री बहुगुणा को छोड़कर किसी भी वीआईपी को आपदा प्रभावित इलाकों में न जाने की सलाह दी थी। उन्होंने मोदी का नाम लिए बिना कहा था कि किसी मुख्यमंत्री को तो छोड़िए देश के गृहमंत्री को भी प्रभावित क्षेत्रों में लैंड करने की इजाजत नहीं है। रेणुका कहती है की वो कांग्रेस उपाध्यक्ष के नाते गये हैं लेकिन मैं कहती हूँ कि देश की जनता राहुल से ये सवाल पूछ रही है कि वो अभी तक कहाँ थे ? राहुल आखिर क्या साबित करना चाह रहे है ?   क्या राहुल के दौरा करने से लोगो की मुसीबते कम हो जायेगी ? मैने देखा है न्यूज में आधी से जायदा सिक्योरिटी तो रा...