प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखा रही है.....{ सच का आइना }.
प्रकृति अपना रौद्र
रूप दिखा रही है.....{ सच का आइना }...
मॉनसून अभी ठीक
तरह से शुरू भी नहीं हुआ है कि देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में
अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है. दिल्ली में आने वाली बाढ़
सारे आगे पीछे के रिकॉर्ड ध्वस्त कर सकती है. हथिनी कुंड बैराज से सोमवार सुबह
इतना पानी छोड़ा गया है, जितना पिछले 100 साल के दौरान कभी नहीं छोड़ा गया. आशंका बताई
जा रही है कि परसों रात से दिल्ली में बाढ़ का गंभीर संकट शुरू हो जाएगा. खास बात
यह है कि दिल्ली में कंट्रोल रूम के दोनों नंबर 011-220512324 व 011-23861837 'डेड' पड़े हैं....
और मंत्री विदेश में है. देखा जाये तो बाढ़ को लेकर बनाए गए 24 घंटों के कंट्रोल रूम ने अभी तक काम करना शुरू नहीं किया है, जबकि सरकार ने 10 दिन पहले दावा किया था कि इन्हें चालू कर दिया गया है.
दिल्ली भी बारिश के लिये अभी तैयार नही है, ना नालों की सफाई का काम पूरा हुआ है ना ही सड़कों को ठीक किया गया है, अभी तक एमसीडी सड़कों पर तोड फोड़ करने में लगी है जब की बारिश के बारे में पहले से बताया जा रहा है. दिल्ली में भी कभी भी बाढ़ का बड़ा खतरा आ सकता है. हजारों के घर, हजारों जिंदगियां दांव पर लगीं हैं. और सरकार सो रही है ठीक इसी तरह उत्तराखंड में भारी बारिश ने भयंकर तबाही मचाई है। पूरे उत्तराखंड में रविवार की सुबह से ही आसमान से आफत बरस रही है। केदारनाथ के रामबाड़ा में बादल फटने से करीब 50 लोग लापता हो गए. वहीं मसूरी के पास धनौल्टी में बादल फटने से 400 लोगों के फंसे होने की खबर है. आलम यह है कि उत्तरकाशी में कई घर बाढ़ में बह गए हैं. चारधाम यात्रा के रास्ते बंद होने से उत्तरकाशी और चमोली में करीब २५ हजार आदमी जहाँ तहां फंसे हुए हैं. ये सत्य है कि प्राक्रतिक आपदा से बचा तो नही जा सकता परंतु बचाव के उपाय तो किये ही जा सकते है. वर्षा के मौसम मे अपन तैयारी सरकार को पूरी तरह रखनी चाहिये क्योंकि ये तो सरकार को पता ही है कि वर्षा मे भूसलखन उत्तराखंड की एक आम समस्या है और कुदरत के आगे किसी की नही चलती.
देखा जाए तो आपदा प्रबंधन के नाम पर पूरा विभाग सिर्फ भ्रष्ट कमाई करने में लगा है. नकारे, गैरजिम्मेदार अफसर और कर्मचारियों को कुछ नही पता की ऐसी आपदा से कैसे निपटें. जब हर साल इनको मौसम विभाग के द्वारा पहले ही चेता दिया जाता है तो जान माल की इतनी हानि क्यों होती है हर साल.
उतराखंड मे टूरिज्म के द्वारा इतनी कमाई होती है तो वहाँ विकास पर रुपये क्यू खर्च नही करती वहां की सरकार. उत्तराखण्ड में भी तो कांग्रेस की सरकार है. क्योंकि उत्तराखंड मे कॉंग्रेस सरकार अपने झगड़ों मे उलझी हुई है, कॉंग्रेस गुटों मे बटी हुई है मुख्यमंत्री बहुगुणा का ध्यान उत्तराखंड मे नही बल्कि दिल्ली मे रहता है ऐसे मे उत्तराखंड मे ना तो राहत कार्य हो रहे है और ना ही कोई व्यवस्था काम कर रही है सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है |
सच तो ये है कि प्रकृति के खिलाफ इंसान की फितरत पर ही यह प्रकृति का प्रकोप है. जब से टिहरी बाँध बना है प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखा रही है. अभी तो न जाने और कितने बाँध बनाने की सरकारी योजना है. आज से बीस साल पहले लोग 2-4 किमी पैदल चल लिया करते थे लेकिन अब हर गाव में सड़क पहुचने की योजनाओं ने भी जनता को प्रकृति के कोपभाजन का शिकार बनाया हैं. पहाड़ो में एक किमी सड़क बनाने में हजारो पेड़ों की बलि दी जाती है. कमाई के लिये पहाड़ों को काट-काटकर जो होटेल, रिज़ॉर्ट और सडकें बनाई जा रही हैं उससे पहाड़ कमजोर पड रहे है .पेड़ों की कटाई से मिट्टी भी ढीली हो गयी है तो बाढ़ भूस्खलन और तबाही का आलम नही होगा तो और क्या होगा.
सुनीता दोहरे
और मंत्री विदेश में है. देखा जाये तो बाढ़ को लेकर बनाए गए 24 घंटों के कंट्रोल रूम ने अभी तक काम करना शुरू नहीं किया है, जबकि सरकार ने 10 दिन पहले दावा किया था कि इन्हें चालू कर दिया गया है.
दिल्ली भी बारिश के लिये अभी तैयार नही है, ना नालों की सफाई का काम पूरा हुआ है ना ही सड़कों को ठीक किया गया है, अभी तक एमसीडी सड़कों पर तोड फोड़ करने में लगी है जब की बारिश के बारे में पहले से बताया जा रहा है. दिल्ली में भी कभी भी बाढ़ का बड़ा खतरा आ सकता है. हजारों के घर, हजारों जिंदगियां दांव पर लगीं हैं. और सरकार सो रही है ठीक इसी तरह उत्तराखंड में भारी बारिश ने भयंकर तबाही मचाई है। पूरे उत्तराखंड में रविवार की सुबह से ही आसमान से आफत बरस रही है। केदारनाथ के रामबाड़ा में बादल फटने से करीब 50 लोग लापता हो गए. वहीं मसूरी के पास धनौल्टी में बादल फटने से 400 लोगों के फंसे होने की खबर है. आलम यह है कि उत्तरकाशी में कई घर बाढ़ में बह गए हैं. चारधाम यात्रा के रास्ते बंद होने से उत्तरकाशी और चमोली में करीब २५ हजार आदमी जहाँ तहां फंसे हुए हैं. ये सत्य है कि प्राक्रतिक आपदा से बचा तो नही जा सकता परंतु बचाव के उपाय तो किये ही जा सकते है. वर्षा के मौसम मे अपन तैयारी सरकार को पूरी तरह रखनी चाहिये क्योंकि ये तो सरकार को पता ही है कि वर्षा मे भूसलखन उत्तराखंड की एक आम समस्या है और कुदरत के आगे किसी की नही चलती.
देखा जाए तो आपदा प्रबंधन के नाम पर पूरा विभाग सिर्फ भ्रष्ट कमाई करने में लगा है. नकारे, गैरजिम्मेदार अफसर और कर्मचारियों को कुछ नही पता की ऐसी आपदा से कैसे निपटें. जब हर साल इनको मौसम विभाग के द्वारा पहले ही चेता दिया जाता है तो जान माल की इतनी हानि क्यों होती है हर साल.
उतराखंड मे टूरिज्म के द्वारा इतनी कमाई होती है तो वहाँ विकास पर रुपये क्यू खर्च नही करती वहां की सरकार. उत्तराखण्ड में भी तो कांग्रेस की सरकार है. क्योंकि उत्तराखंड मे कॉंग्रेस सरकार अपने झगड़ों मे उलझी हुई है, कॉंग्रेस गुटों मे बटी हुई है मुख्यमंत्री बहुगुणा का ध्यान उत्तराखंड मे नही बल्कि दिल्ली मे रहता है ऐसे मे उत्तराखंड मे ना तो राहत कार्य हो रहे है और ना ही कोई व्यवस्था काम कर रही है सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है |
सच तो ये है कि प्रकृति के खिलाफ इंसान की फितरत पर ही यह प्रकृति का प्रकोप है. जब से टिहरी बाँध बना है प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखा रही है. अभी तो न जाने और कितने बाँध बनाने की सरकारी योजना है. आज से बीस साल पहले लोग 2-4 किमी पैदल चल लिया करते थे लेकिन अब हर गाव में सड़क पहुचने की योजनाओं ने भी जनता को प्रकृति के कोपभाजन का शिकार बनाया हैं. पहाड़ो में एक किमी सड़क बनाने में हजारो पेड़ों की बलि दी जाती है. कमाई के लिये पहाड़ों को काट-काटकर जो होटेल, रिज़ॉर्ट और सडकें बनाई जा रही हैं उससे पहाड़ कमजोर पड रहे है .पेड़ों की कटाई से मिट्टी भी ढीली हो गयी है तो बाढ़ भूस्खलन और तबाही का आलम नही होगा तो और क्या होगा.
सुनीता दोहरे
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